आदिवासियों के पुरातन ज्ञान को आधुनिकता के साथ मेल कर उनको लाभाविंत करेगा नई शिक्षा नीतिः डॉ लुईस

नई शिक्षा नीति पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन

दुमका, 13 सितंबर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ झारखंड के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित हुई। वेबिनार झारखंड प्रांत एबी आरएसएम अध्यक्ष डॉ प्रदीप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुई। कार्यक्रम प्रारम्भ में वेबिनार के संयोजक डॉ अजय सिंहा ने विषय प्रवेश करवाते हुए कहा कि आज़ादी के बाद दो शिक्षा नीति पहले भी लाई गई। लेकिन वह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाई। वर्तमान नीति शिक्षा के स्वरुप में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए भारत को नहीं सिर्फ़ आत्म निर्भर, बल्कि विश्व गुरु बनाने का लक्ष्य रखता है।
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो संजीव कुमार शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न आयामों की चर्चा की। उन्होंने कहा की अब तक की शिक्षा नीति पश्चिम के अंधनुकरन में लगा था। लेकिन वर्तमान नीति भारतीय मानस और भारत की सोच के साथ भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प रखती है। नई शिक्षा नीति ने भारत की प्राचीन शिक्षा की परम्परा को जीवंत करने का प्रयास किया गया है। हमारे पुराने विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय थे। इसलिए भारत को विश्व गुरु दर्जा प्राप्त था। एनईपी न केवल वैश्विक बल्कि राष्ट्रीय जीवन की आकांक्षाओं की प्राप्ति का साधन बनाने का प्रयत्न किया गया है। विकास के साथ सामाजिक समरसता के लक्ष्य को प्राप्त करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
मुख्य वक़्ता महाराज सियाजी राव विश्वविद्यालय, बरोदा के प्रोफ़ेसर और महासंघ के उच्च शिक्षा समवर्ग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो प्रगणेश शाह ने कहा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21 वीं शदी की ज़रूरतों को ध्यान में रख कर बनाई गई है। इस नीति को बनाने में पांच वर्ष का समय लगा है। कस्तूरीरंजन की अध्यक्षता मे व्यापक विचार विमर्श कर ऐसे ढांचागत बदलाव लाए गए हैं। जो देश की दिशा और दशा बदलेगी। इस नीति में प्राथमिक शिक्षा के साथ साथ व्यवसायिक शिक्षा को भी जोड़ा गया है। इससे छात्रों को किसी भी व्यवसायिक शिक्षा पूर्णता के साथ प्राप्त होगी। जो उनको आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देगा। शिक्षकों के रूप में देश के सर्वश्रेष्ठ छात्रों के रूप में नियुक्ति होगी और शिक्षकों की समस्या के समाधान के लिए उच्च शिक्षा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। छात्रों के रचनात्मक शक्ति के विकास पर पुरा ज़ोर दिया गया है। शिक्षा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्रदान करने के लिए विश्व के कुछ श्रेष्ठ संस्थानो को यहां अपना कैंपस खोल सकेंगे। बल्कि भारतीय विश्वविद्यालय भी विदेश में अपना कैंपस खोल सकेंगे।
विशिष्ट अथिति पूर्व समाज कल्याण मंत्री डॉ लोईस मरांडी ने कहा की पूर्व की शिक्षा नीति बेरोज़गारों की फ़ौज तैयार कर रही थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में रोज़गार की अपार सम्भावनाएं मिलेंगी। शोध को बढ़ावा मिलेगा। मातृभाषा में शिक्षा से जनजाति समाज को काफ़ी लाभ मिलेगा और प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित कर आदिवासियों के पुरातन ज्ञान को आधुनिकता के साथ मेल कर उनको लाभान्वित करेगा।
विशिष्ट अथिति सिदो क़ांहु मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ ध्रुव नारायण सिंह ने कहा की 1980 के बाद कोई भी पद सृजित नहीं हुआ है और छात्र-शिक्षक अनुपात काफ़ी बढ़ गया है। शिक्षकों के सहयोग के बिना राष्ट्रीय शिक्षा नीति सफल नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा की कुछ लोग और संगठन राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भ्रम फैला रहे है। इस तरह का आयोजन उनका सामना करने के लिए ज़रूरी है। झारखंड महिला प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ सुनिता गुप्ता ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को महिलाओं के लिए लाभप्रद बतलाया।
कार्यक्रम का आरम्भ डॉ शशि शेखरदास के सरस्वती वंदना से हुआ। प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ संजय कुमार सिंह ने अथितियों का परिचय और स्वागत किया। कार्यक्रम में मंच संचलन संगठन मंत्री डॉ राजकुमार चौबे एवं धन्यवाद ज्ञापन रांची विश्वविद्यालय के डॉ ज्योति प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में कई राज्यों के शिक्षक, प्राचार्य और संघ के उच्च शिक्षा समवर्ग के राष्ट्रीय प्रभारी महेंद्र कुमार उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनने में झारखंड के महामंत्री डॉ ब्रजेश कुमार, सिदो क़ांहु मुर्मू विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष डा अंजनी शर्मा, सचिव डा राजीव सिंहा और कोषाध्यक्ष प्रो इंद्रनील मंडल ने विशेष सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का समापन डॉ भारती प्रसाद के शांति मंत्र से हुआ।

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