कॉउंसलिंग स्किल्स पर वेब वर्कशॉप में मुख्य वक्ता रहे एसपी कॉलेज मनोविज्ञान शिक्षक डॉ विनोद शर्मा

कॉउंसलिंग स्किल्स पर वेब वर्कशॉप में मुख्य वक्ता रहे एसपी कॉलेज मनोविज्ञान शिक्षक डॉ विनोद शर्मा

दुमका, 15 जुलाई। संताल परगना कॉलेज,दुमका के मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सह मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र के निदेशक डॉ विनोद कुमार शर्मा ने कोल्हान विश्वविद्यालय से स्थाई सम्बद्ध प्राप्त करीम सिटी कॉलेज , जमशेदपुर के द्वारा आयोजित ’कॉउंसलिंग स्किल्स’ विषय पर एक दिवसीय वेब-वर्कशॉप में विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता के रूप में विषय पर बोलते हुए कहा कि वर्त्तमान में कोविड-19 के कारण उत्पन्न आपात प्रबंधन में परामर्श व साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड की भूमिका सर्वाधिक है। लोगो मे परिस्थितिजन्य उत्पन्न तनाव,भय व अवसाद आदि घर कर गया है। लोग आत्महत्या तक कर रहे है। आर्थिक परेशानी हो, विद्यार्थियों के लिए कैरियर हो, सांवेगिक विरेचन में गतिरोध हो, स्वच्छंद व्यवहारों पर रोक हो, तनावग्रस्त घेरलू माहौल आदि सभी कारणों से लोग मानसिक रूप से चिंतित व परेशान है। जहां वो अपनी ऐसी समस्याओं को समाधान चाहता है। वो ऐसा उपाय चाहता है जिससे उनके मानसिक रोग लक्षणों का सफलतापूर्वक प्रबंधन हो। जहाँ के सार्थक परामर्श सेवा के लिए माइक्रो कॉउंसलिंग स्किल्स का होना आवश्यक होता है। यह वेब वर्कशॉप की संगति व सार्थकता इस बात से रही कि इससे ना केवल उन विद्यार्थियों, स्वास्थ्य कर्मियों व खासकर के प्रोफेशनल काउंसेलर के ज्ञानवर्धन में बर्धन हुआ बल्कि वैसे तमाम लोग इसकी सतत व्यापक उपयोगिता व अनुभवों से भी परिचित हुए। जिसका फायदा मुश्किलों व परेशानियों से घिरे या जूझ रहे लोगों को आवश्यक रूप से मिलेगा। डॉ शर्मा ने माइक्रो कॉउंसलिंग स्किल्स की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि यह लघु परामर्श कौशल वो है जिसकी व्यवहारिकता से क्लाइंट को उनकी समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से होता है। साथ ही किसी भी कॉउंसलिंग प्रक्रिया को प्रभावकारी बनाने के लिए काउंसेलर का ये अनिवार्य गुण होना चाहिए जो क्लाइंट से चिकित्सीय अच्छे व मजबूत विश्वसनीय दोस्ताना संबंध बनाने के बाद क्लाइंट के बातो को सुनने, प्रश्न करने, पारा फ्रेजिंग,नॉन-जजमेंटल, एमपेथी, कांफ़्रांटिंग, फैसिलिटेटिंग, बेहवियर ऑब्जर्वेशन, समरिज़िंग, आदि व्यवहारिक रास्तों से गुजरते हुए समस्या समाधान करने में उसकी दक्षता को दर्शाता हो। डॉ शर्मा ने इससे पूर्व परामर्श की चर्चा करते हुए कहा कि यह ना केवल मानसिक विकारों की रोकथाम की प्रक्रिया है बल्कि विचलनों से लोगो को बचाने एवम उन्नत उन्नत स्वास्थ्य वर्धन हेतु आमने-सामने की परिस्थिति में किया गया कार्य है जिससे एक व्यक्ति (परामर्शदाता) दूसरे व्यक्ति (क्लाइंट या मानसिक रोगी) के जीवन परिस्थितियों के उलझें समस्याओं को सुझाव व अन्य चिकित्सीय परामर्श तकनीकों के नॉन-जजमेंटल तरीके से सुलझाने का प्रयास करता है। साथ ही परामर्श किन बातों से होकर गुजरती है उन प्रक्रियाओं की भी चर्चा की है। तथा साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड की उपयोगिता व व्यवहारिकता का भी उल्लेख किया। इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संबोधन करते हुए करीम सिटी कॉलेज के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष सह कन्वेनर डॉ फ़िरोज़ इब्राहीमी ने कहा कि परामर्श आज की दैनिक आवश्यकता हो चली है। आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श की उपयोगिता देखी जा रही है। वही मौके पर उपस्थित कॉलेज प्राचार्य डॉ रियाज़ ने कहा कि परामर्श की आवश्यता इस बात से हो जाती है कि पूरा मानव कोविड-19 के गिरफ्त में है। भय व अवसादों से घिरा है जिससे बाहर निकले का एक सरल उपाय परामर्श ही है। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज़क्की अख्तर ने की। कार्यक्रम में झारखंड राज्य के बाहर राज्यों के विभिन्न कॉलेज स्टूडेंट्स के अलावा अन्य स्वास्थ्य प्रोफेशनल मिलाकर कुल 200 के करीब रजिट्रेशन कराया व इस कार्यक्रम में हिस्सा भी लिया।

Niraj Singh

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