लॉकडाउन में लिख डाली साहित्यकार चंदन ने दो-दो उपन्यास

लॉकडाउन में लिख डाली साहित्यकार चंदन ने दो-दो उपन्यास

राजमहल की पहाड़ियां, दिल की बात, लौट आना सिम्मी, यायावर, बसंती विहीन मन सहित कई रचानाएं लिखी

दुमका, 16 जून। जाने-माने साहित्यकार, समीक्षक एवं पत्रकार चंद्र विजय प्रसाद ‘चंदन’ ने एक बार फिर अपनी साहित्य क्षमता और दक्षता का परिचय दिया है। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर लगाए गए लॉकडाउन में खाली पड़े समय का सदुपयोग कर उन्होंने अपनी साहित्यिक विधा को और सशक्त और धनी बनाने का काम किया। उन्होंने बताया कि खाली बैठे समय में उन्हें लिखना पढ़ना सबसे अधिक पसंद है। लॉकडाउन में समय का सदुपयोग करते हुए उन्होंने ‘शांभवी’ और ‘जानकी नापित’ नामक दो-दो उपन्यास लिख डाला। शांभवी उपन्यास में चंदन ने प्यार के जाल में फांसे गए एक सीधे-सादे लड़के की कहानी को चित्रित किया है। जिसमें एक लड़का दो लड़की से प्रेम करता है और किस तरह लड़कियां उसे बस केवल अपने स्वार्थ सिद्ध हो जाने पर कष्ट में अकेला छोड़ चली जाती हैं। इसी प्रकार जानकी नापित नामक दूसरे उपन्यास में उन्होंने जानकी नापित नामक एक गरीब की पीड़ा का वर्णन किया है। बताया है कि किस प्रकार जानकी की पत्नी बीमारी से ग्रसित रहती है। वह अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए अपनी झोपड़ी में बांस के खोखले हिस्से में पैसे जमा करता है। एक बड़ी राशि जब जमा हो जाती है वह अपनी पत्नी का इलाज कराने की जुगत में जुट ही जाता है। लेकिन इसी बीच किस्मत उसे दगा दे जाती है। उसकी झोपड़ी में किसी कारणवश आग लग जाती है और उसके घर के साथ-साथ उसके अरमान, उसकी मेहनत से जमा किया हुआ है पैसा भी खाक में बदल जाता है। चंदन ने कहा कि साहित्य की सेवा करना बचपन से ही उनका काम रहा है। पिता सुरेश प्रसाद एवं माता श्रीमती ईला प्रसाद के सुपुत्र चंदन इसके पहले प्रबंध काव्य राजमहल की पहाड़ियां, उपन्यास सिम्मी, कथा संग्रह मांस, काव्य संग्रह दिल की बात, उपन्यास लौट आना सिम्मी, यायावर, बसंती विहीन मन, काव्य संकलन खिलते नहीं पर पलाश राजमहल की पहाड़ियों पर, हम मुस्कान सजाया करते हैं। अनपढ़ पाषाण भी बोलते हैं और क्षितिज के संधि स्थल लिख चुके हैं। ये सभी प्रकाशित भी हो चुकी हैं। दुमका जिले के जरमुंडी थाना क्षेत्र के बासुकीनाथ के रहने वाले चंदन की शीघ्र प्रकाश्य कृतियों में उपन्यास मुक्ति पथ, काव्य संग्रह रेतीला नदी, मतवाला और नारी निर्माण से निर्वाण तक शामिल हैं।

Niraj Singh

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