संसद का शीतकालीन सत्र चलेगी 18 नवंबर से 15 दिसंबर तक

नागरिकता संशोधन बिल सरकार के एजेंड में होगी महत्वपूर्ण

संसद का शीतकालीन सत्र चलेगी 18 नवंबर से 15 दिसंबर तक

नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार 18 नवंबर से शुरू हो रहा है। सत्र की शुरुआत से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक में सदन को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा हुई। संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलेगा। लगभग 25 दिन के सत्र में सरकार जहां कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों को संसद से पारित कराने पर जोर देगी। वहीं विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है।

सरकार को घेरने की तैयारी में है विपक्ष

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाये जाने के बाद यह संसद का पहला सत्र है। इसलिए विपक्ष इस मुद्दे को सदन में उठायेगा। साथ ही कश्मीर में लगी पाबंदियों पर भी हंगामा मचेगा। कांग्रेस पार्टी मंदी के मुद्दे को उठाकर भी सरकार को घेर सकती है। इसी क्रम में 30 तारीख को कांग्रेस पार्टी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली आयोजित कर रही है।
नागरिकता संशोधन बिल होगी महत्वपूर्ण
वहीं खबर है कि सरकार इस सत्र में कई अहम बिल पेश करेगी। जिसमें नागरिकता संशोधन बिल सबसे महत्वपूर्ण है। इस विधेयक के कानून बनने से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय महज छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। इस बिल का काफी विरोध हो रहा है, क्योंकि पूर्वोत्तर के लोगों का कहना है कि यदि यह बिल पास होता है तो इससे राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत के साथ खिलवाड़ होगा। इसके अतिरिक्त सरकार व्यक्तिगत डाटा संरक्षण बिल भी लायेगी। यानी कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार होगा।

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