गर्म जल कुंड में आस्था की डूबकी लगा सफाहोड़ समुदाय ने पूजा-अर्चना

मकर संक्रांति पर गर्म जल कुंड में आस्था की डूबकी लगा सफाहोड़ समुदाय ने पूजा-अर्चना

संथाल परगना सहित आस-पास के राज्यों से जुटते है आदिवासी समुदाय के लोग

पाकुड़। प्रकृति की गोद में बसे पाकुड़िया के सिदपुर स्थित गर्म पानी के कुंड में मकर संक्रांति के मौके पर मंगलवार को हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डूबकी लगायीं। खासकर आदिवासी सफाहोड़ समुदाय के लिए यह स्थान तीर्थ स्थल माना जाता है। जहां मकर संक्रांति के मौके पर न सिर्फ इस इलाके के बल्कि पश्चिम बंगाल, असम, ओड़िसा आदि राज्यों से भी संथाल श्रद्धालु बड़ी संख्या में अपने अपने धर्म गुरूओं के साथ एक दिन पूर्व ही पहुंच जाते हैं। वे कुंड के इर्द गिर्द फैले मैदान में अपनी तंबू खड़ी कर रहते हैं। मंगलवार की अहले सुबह से ही गुरू बाबाओं ने अपने शिष्यों के साथ पवित्र गर्म कुंड में स्नान कर आयोजन समिति द्वारा आवंटित स्थान पर पारंपरिक रूप से पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना किया। इस मौके पर यहां विशाल मेला लगता है। जिसके मद्देनजर आयोजकों के आग्रह पर स्थानीय प्रशासन के द्वारा अग्निशमन, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा शिविर के साथ ही स्वागत व सहायता कक्ष की भी व्यवस्था की गई है। दो दिवसीय इस मेले के मद्देनजर पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए हैं। मेले मीना बाजार, चरखी, संथाली जात्रा (पारंपरिक- सांस्कृतिक ओपेरा) के अलावा छोटे सर्कस आदि मनोरंजन के अनेकों साधन मौजूद हैं। जिसका लुफ्त यहां आने वाले हर आम व खास उठाते हैं। मौके पर साफाहोड़ गुरू राम बाबा ने बताया कि हम यहां अपने इष्ट देव की आराधना कर संपूर्ण समाज व राष्ट्र की कल्याण की कामना करते हैं। जिससे सभी लोगों को सुख शांति व समृद्धि प्राप्त हो। साथ ही हमारा धर्म, हमारी संस्कृति व परंपरा कायम रहे। इस मौके पर गैर आदिवासी समुदाय भी बड़ी संख्या में गर्म कुंड में स्नान व पूजा पाठ करते हैं। इसके अलावा जिले के हिरणपुर के रानीपुर स्थित परगला नदी में स्नान कर साफाहोड़ समुदाय के लोगों ने पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना की।

गर्म कुंड तांतलोई में सफाहोड़ समुदाय के लोग करते हैं विशेष पूजा-अर्चना

दुमका। मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में हर साल की भांति सफाहोड़ समुदाय के लोग गर्म जलकुंड तात्तलोई विशेष रूप से पूजा-अर्चना मंगलवार को किया गया। प्रसिद्ध गर्मकुंड तांतलोई जिले के जामा प्रखंड के बारापलासी बाजार से करीब तीन किलोमीटर की दूर पर अवस्थित है। साफा-होड़ समुदाय के लोग विशेष पूजा अर्चना के बारे में गोपीकांदर प्रखंड के डुमरिया गांव से आये सफाहोड़ समुदाय के गुरु माने जानेवाले सनातन धर्म के रामसाधु शुकुल मुर्मू ने बताया कि यह पूजा सनातन धर्म से जुड़ा हुआ है। हमलोग वर्षों से साफा होड़ समुदाय के लोग मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से पूजा करने का परंपरा चलते आ रही है। जिस परंपरा का सफाहोड़ समुदाय के लोग निर्वाह कर रहे हैं। साफा होड़ समुदाय के लोग ईष्टदेव शिव और प्रकृति की पूजा मुख्य रूप से करते है। यह समुदाय के महिलाएं एवं पुरूष सफेद लिबास में धोती और साड़ी पहन परांपरिक रिति-रिवाज से एक साथ पूजा-अर्चना करते है।

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